BAPS के संत स्वामी भद्रेशदासजी को राष्ट्रीय सम्मान, ‘प्रस्थानचतुष्टये ब्रह्मघोष’ को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

भारत सरकार ने साल 2025 का प्रतिष्ठित ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ घोषित कर दिया है. संस्कृत भाषा के लिए यह सम्मान विद्वान महामहोपाध्याय स्वामी भद्रेशदासजी को उनकी रचना ‘प्रस्थान चतुष्टये ब्रह्मघोष’ के लिए दिया गया है. भारत की सर्वश्रेष्ठ संस्कृत कृति के रूप में चयनित इस ग्रंथ में हिंदू धर्म के मुख्य ग्रंथों (उपनिषद, भगवद गीता और ब्रह्मसूत्र) के साथ-साथ भगवान स्वामिनारायण के ‘वचनामृत’ के आधार पर ‘ब्रह्म’ तत्व के स्वरूप को विस्तार से समझाया गया है. इसे बहुत ही सुंदर तरीके से लिखा गया है.

सूत्रात्मक (सूत्र शैली) और काव्यात्मक रूप में रचित इस ग्रंथ को विद्वानों द्वारा दार्शनिक काव्य की उत्कृष्ट कृति माना गया है. इसकी साहित्यिक विशेषताओं और गहन दार्शनिकता को ध्यान में रखते हुए चयन समिति ने इसे वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ संस्कृत रचना के रूप में चयनित किया है.

यह ग्रंथ भगवान स्वामिनारायण द्वारा प्रतिपादित दर्शन को साहित्यिक शैली में प्रस्तुत करता है. साल 2018 में प्रकाशित इस कृति का लेखन स्वामी भद्रेशदासजी ने परम पूज्य महंत स्वामी महाराज के मार्गदर्शन और आज्ञा से किया था.

साहित्यिक जगत में उत्साह की लहर

इस घोषणा से देशभर के विद्वानों और साहित्यिक जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई है. यह सम्मान संस्कृत भाषा की निरंतर प्रासंगिकता को दर्शाता है. यह भारत का एक प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है, जो 24 भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट कृतियों को प्रदान किया जाता है.

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