पाकिस्तान भरोसेमंद नहीं, अमेरिका ने उसका इस्तेमाल कियाः इस्लामाबाद की मध्यस्थता पर इजराइली
मध्य पूर्व में 2 हफ्ते के लिए हुए युद्धविराम के बाद भी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है. दोनों पक्षों की ओर से हमले होने की बात कही जा रही है. ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते की 3 शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया. उसका कहना है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम और बातचीत गलत है. इस बीच जंग को खत्म करने को लेकर पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच बातचीत होने वाली है. लेकिन इजराइल को पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर संदेह है.
भारत में इजराइल के राजदूत, रूवेन अजार ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही संघर्ष विराम वार्ता में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है. अजार ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, “हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय खिलाड़ी के तौर पर नहीं देखते.” उनका मानना है कि पाकिस्तान को शामिल करने के पीछे वॉशिंगटन की अपने वजह हो सकती हैं. उन्होंने कहा, “अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.”
अमेरिका पहले भी ऐसा कर चुकाः अजार
मध्यस्थता को लेकर पहले के प्रयासों का जिक्र करते हुए इजराइली दूत ने कहा कि अमेरिका ने पहले भी समझौते कराने के लिए “कतर और तुर्की जैसे समस्याग्रस्त देशों” के साथ काम किया है, जिसमें हमास जैसे संगठन के साथ हुए समझौते भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए बहुत जरूरी है कि हम अमेरिका के साथ तालमेल बिठाकर चलें, खासकर जब बात उन नतीजों के मूल तत्व और सार की हो, जिन्हें हम देखना चाहते हैं.”
भारत के रुख से मिली राहतः राजदूत अजार
भारत का जिक्र करते हुए अजार ने कहा, “मुझे इस बात से हौसला मिला है कि भारत सरकार ने बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने मांग की है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए. मुझे लगता है कि यह बिल्कुल सही रुख है, और भारत समेत कोई भी देश, ईरान की सरकार की इस बेतुकी मांग के आगे झुकने वाला नहीं है कि इस होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदियां लगाई जाएं.”
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान रवाना
अजार की यह टिप्पणी अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा के बाद आई है. इस सहमति के तहत, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस हफ्ते के आखिर में एक दीर्घकालिक समझौता सुनिश्चित करने के मकसद से मध्यस्थता वार्ता के लिए पाकिस्तान जाने वाले प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे.
युद्धविराम पर बात करते हुए अजार ने कहा कि इजराइल को उम्मीद है कि इन बातचीत के परिणामस्वरूप “2 अस्तित्वगत खतरों”- ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन क्षमता- का खात्मा हो जाएगा. उनका कहना है कि इजराइल का टॉरगेट “ईरानी शासन को कमजोर करके ईरानी लोगों को अपने भविष्य को संवारने का अवसर देना” था, और उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमने इसे हासिल कर लिया है.
सीजफायर के बीच लेबनान पर हमला जारी
भारत में इजराइल के राजदूत अजार ने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमें दोबारा सैन्य कार्रवाई का सहारा नहीं लेना पड़ेगा, लेकिन अगर ईरानी शासन हमारे पास कोई और विकल्प नहीं छोड़ता, तो हम ऐसा जरूर करेंगे.” इससे पहले, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसी तरह की अपनी राय रखी थी.
इस बीच लेबनान पर हमले लगातार जारी हैं और वहां खासी तबाही हुई है. इस बीच ईरान ने चेतावनी देते हुए इजराइल पर युद्धविराम को खतरे में डालने का आरोप लगाया, साथ ही यह भी चेतावनी दी कि लेबनान पर लगातार हो रहे हमलों से यह समझौता पटरी से उतर सकता है और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव फिर से भड़क सकता है.
दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नेतन्याहू दोनों नेताओं का लगातार यही रुख है कि लेबनान इस युद्धविराम समझौते के दायरे में नहीं आता है. इससे पहले इजरायल ने बुधवार को लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले किए, जिनमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों की संख्या में लोग घायल हुए. इस हमले पर उपराष्ट्रपति वैंस ने सफाई देते हुए कहा कि यह तनाव अप्रत्याशित नहीं है. मुझे लगता है कि ईरानियों को लगा था कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, जबकि ऐसा नहीं था.”
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