अमेरिका की आंखों में धूल झोंक रहा पाकिस्तान? ईरान से समझौते के नाम पर पर्दे के पीछे चल रहा दूसरा खेल

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता कराने की जिम्मेदारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को दे रखी है. समझौते तक पहुंचने के लिए अमेरिका और ईरान के साथ-साथ पाकिस्तान, चीन, सऊदी अरब, तुर्की और कतर जैसे देशों के साथ कई दौर की बैठकें कर चुका है. हालांकि, इन बैठकों की असली कहानी अब सामने आई है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, सऊदी अरब, कतर और तुर्की के साथ रक्षा संबंधी जो समझौता है, वह लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इस पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं.

पाकिस्तान की इस पहल को अमेरिका के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि मध्य पूर्व के अधिकांश देश अब तक अमेरिकी सुरक्षा पर ही निर्भर रहे हैं.

अमेरिका की आंखों में PAK ने धूल झोंका, 3 फैक्ट्स

  1. सीबीएस न्यूज के मुताबिक अमेरिका की तरफ से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने जंग के दौरान अपने बेस पर ईरान के प्लेन को छुपा रखा था. सैटेलाइट से इसका खुलासा हुआ है. अमेरिका और इजराइल के हमलों से बचाने के लिए इन्हें पाकिस्तान के बेस पर रखा गया था. ट्रंप के करीबी सांसद लिंडसे ग्राहम ने इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान पर धोखा देने का आरोप लगाया है. वहीं पाकिस्तान ने इस आरोप को खारिज किया है.

2. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के मुताबिक हाल के दिनों में कतर, तुर्की और सऊदी के साथ पाकिस्तान ने कई दौर की बैठकें आयोजित की है. इन बैठकों में इस्लामिक नाटो के गठन पर चर्चा हुई, जिसका प्रस्ताव अब फाइनल स्टेज में है. दिलचस्प बात है कि पाकिस्तान इन बैठकों को ईरान और अमेरिका समझौता से जोड़ रहा था.

3. कुछ दिन पहले पाकिस्तान और ईरान ने ग्वादर पोर्ट को लेकर एक समझौता किया था. इसके तहत ईरान अपने सामान को ग्वादर से भेज (या बेच) सकता है. यह भी अमेरिका के लिए एक झटका माना गया, क्योंकि अमेरिका ने होर्मुज के बाहर ईरानी जहाजों के विरुद्ध कार्रवाई की घोषणा कर रखी है.

बड़ा सवाल- इस्लामिक नाटो की जरूरत क्यों है?

कतर के पूर्व प्रधानमंत्री हमद बिन थानी के मुताबिक इजराइल मिडिल ईस्ट के स्ट्रक्चर को बदलना चाहता है. इससे बचने के गल्फ या इस्लामिक नाटो की जरूरत है. 2025 में पाकिस्तान ने सऊदी के साथ एक समझौता किया था. इस समझौते के तहत सऊदी को पाकिस्तान से परमाणु सुरक्षा की गारंटी मिली थी. पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में इसे बढ़ाने की कवायद में जुटा है.

बदले में इन देशों से पाकिस्तान को पैसे मिलने की उम्मीद है. पाकिस्तान पर वर्तमान में 10 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा का कर्ज है.

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