इन 7 वजहों से औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, अभी और कितनी होगी गिरावट?

सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही. बाजार खुलते ही निवेशकों के लगभग 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए. बाजार में चारों तरफ सिर्फ लाल निशान ही नजर आ रहा था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड सभी कंपनियों की कुल वैल्यू तेजी से गिरकर 437 लाख करोड़ रुपये रह गई है. सेंसेक्स लगभग 2,400 अंक का गहरा गोता लगाकर 76,424 पर आ गिरा, वहीं निफ्टी 50 भी 700 अंक टूटकर 23,750 के स्तर पर पहुंच गया.

गिरावट का आलम यह था कि इंडिगो जैसी बड़ी कंपनी के शेयर 8 प्रतिशत तक गिर गए. टाटा स्टील, एलएंडटी, एसबीआई और मारुति सुजुकी के शेयरों में 5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई. सरकारी बैंकों (PSU Bank) के शेयरों ने निवेशकों को सबसे ज्यादा निराश किया और इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया. आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया? आइए विस्तार से समझते हैं वो 7 कारण, जिनकी वजह से शेयर बाजार में यह भारी तबाही आई है.

1. कच्चे तेल की कीमतों में लगी भयंकर आग

बाजार में दहशत फैलने का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) का महंगा होना है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई रुकने का डर पैदा हो गया है. इसके चलते वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) और ब्रेंट क्रूड, दोनों की कीमतें लगभग 30 प्रतिशत उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहला मौका है, जब तेल ने 100 डॉलर का स्तर पार किया है. होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, वहां व्यापारिक जहाजों पर हमलों के डर से आवाजाही लगभग ठप है.

2. मिडिल ईस्ट में भड़का भीषण युद्ध

कच्चे तेल में आग लगने की जड़ मध्य पूर्व का युद्ध है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की जंग अब 10वें दिन में पहुंच गई है. सप्ताहांत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई तेल डिपो पर बड़े सैन्य हमले किए. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरें हैं, जिसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने कमान संभाल ली है. ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों पर ड्रोन दागे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि युद्ध तभी रुकेगा जब ईरान की सत्ता खत्म हो जाएगी. इस माहौल ने दुनियाभर के निवेशकों को डरा दिया है.

3. डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया

कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर हमारी मुद्रा पर पड़ा है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 0.5 प्रतिशत कमजोर होकर 92.19 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुल गया. जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत को उसे खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब तक पश्चिमी एशिया में तनाव रहेगा और कच्चे तेल के दाम ऊंचे रहेंगे, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा.

4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिका में सरकारी बॉन्ड (Treasury yields) पर मिलने वाला ब्याज लगातार चौथे दिन बढ़ गया है और 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.208% पर पहुंच गई है. शेयर बाजार की भाषा में इसे ऐसे समझें कि जब सरकारी बॉन्ड पर अच्छा और सुरक्षित रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक शेयर बाजार का जोखिम उठाने के बजाय अपना पैसा वहां लगा देते हैं. यही वजह है कि शेयरों से पैसा निकाला जा रहा है.

5. विदेशी निवेशकों (FIIs) ने समेटा बोरिया-बिस्तर

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं. बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले हफ्ते में ही लगभग 16,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. वहीं, महीने के शुरुआती चार कारोबारी दिनों में ही 21,829 करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिए गए. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है कि जब तक मध्य पूर्व के हालात नहीं सुधरते और कच्चा तेल सस्ता नहीं होता, तब तक विदेशी निवेशकों के वापस लौटने की उम्मीद बहुत कम है.

6. दुनिया भर के बाजारों में मची है घबराहट

यह हाहाकार सिर्फ भारत में नहीं मचा है. कच्चे तेल के झटके से पूरे एशिया के बाजार धड़ाम हो गए हैं. जापान का निक्केई इंडेक्स 6 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 8 प्रतिशत क्रैश हो गया. हांगकांग और चीन के बाजार भी गिरे हैं. इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका और यूरोप के बाजार भी भारी नुकसान के साथ बंद हुए थे. जब पूरी दुनिया के बाजारों में डर का माहौल होता है, तो भारतीय बाजार भी उससे अछूते नहीं रह सकते.

7. महंगाई बढ़ने का डर

रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक, अगर यह युद्ध लंबा चला तो भारत की मुश्किलें बढ़ेंगी. महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर देश में महंगाई (Inflation) बढ़ाएगा. पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और रोजमर्रा का सामान महंगा हो जाएगा. महंगाई बढ़ने के कारण रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरें कम करना मुश्किल हो जाएगा, यानी आम आदमी के लोन की ईएमआई सस्ती होने में अभी और समय लग सकता है.

निवेशक अब क्या करें?

बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ 20 प्रतिशत उछलकर 23.90 पर पहुंच गया है. बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से युद्ध या भू-राजनीतिक संकटों का असर बाजार पर ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहता.

विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, सीमेंट, डिफेंस और फार्मा जैसे सेक्टर इस संकट में भी मजबूती से टिके रह सकते हैं. तकनीकी रूप से, निफ्टी के लिए 22,500 के ऊपर रहना जरूरी है. अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार 22,000 से 21,500 तक भी फिसल सकता है.

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