नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की होती है पूजा, जानें कौन हैं ये माता

Chaitra Navratri 2026: इस साल 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है, जिसका समापन 27 मार्च को राम नवमी के पर्व के साथ हो जाएगा. नवरात्रि के दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. उनको भोग लगाया जाता है. साथ ही उपवास रखा जाता है. नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री का पूजन किया जाता है.

मां शैलपुत्री के पूजन से जीवन में स्थिरता और दृढ़ता आती है. पारिवारिक स्थिति, दांपत्य जीवन, कष्ट क्लेश और बीमारियां दूर होती हैं. ऐसे में आइए माता दुर्गा के इस पहले स्वरूप के बारे में विस्तार से जानते हैं.

कौन हैं माता शैलपुत्री?

मां शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ यानी बैल पर सवार होती हैं. माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है. मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की बेटी हैं. पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा. देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक बार प्रजापति दक्ष ने अपने यहां एक विशाल यज्ञ आयोजित किया.

इस यज्ञ में उन्होंने समस्त देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन भगवान शिव और अपनी पुत्री पावर्ती को आमंत्रण नहीं भेजा. इस पर भी देवी पार्वती ने यज्ञ में जाने की बात कही तो भगवान शिव ने देवी को यज्ञ में जाने से मना कर दिया, लेकिन माता नहीं मानीं और वे समारोह में चली गईं. यज्ञ में प्रजापति दक्ष ने देवी पार्वती और भगवान शिव का खूब अपमान किया.

माता ने तप करके महादेव को पति रूप में प्राप्त किया

भगवान शिव के अपमान से माता को बहुत दुख हुआ और उन्होंने यज्ञ की वेदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए. इसके बाद देवी पार्वती ने पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लिया और माता का नाम शैलपुत्री पड़ा. इसके बाद माता ने भगवान शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की. माता के तप से प्रसन्न हो कर महादेव पार्वती को पति रूप में मिले.

 

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