दुनिया की टॉप 500 लिस्ट से कट गया भारत की इन ब्लू-चिप कंपनियों का नाम, ये रही पूरी लिस्ट
जो कंपनियां कल तक भारतीय शेयर बाजार की शान थीं, आज वे वैश्विक पटल पर अपनी जगह बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही हैं. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक (जियो-पॉलिटिकल) तनाव ने भारतीय ‘ब्लू-चिप’ कंपनियों के वैल्युएशन को तगड़ा झटका दिया है. स्थिति यह है कि दुनिया की 500 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची से कई दिग्गज भारतीय नाम पूरी तरह गायब हो चुके हैं.
किन दिग्गजों की हुई छुट्टी?
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि वैश्विक बाजार में भारतीय कंपनियों का दबदबा कम हुआ है. सितंबर 2024 में जहां दुनिया की टॉप-500 कंपनियों में 18 भारतीय नाम शामिल थे, वहीं 2026 की शुरुआत में यह संख्या घटकर 15 रह गई. अब ताजा हालातों में केवल 11 भारतीय कंपनियां ही इस एलीट लिस्ट में अपनी जगह बचा पाई हैं.
इस साल की शुरुआत से अब तक आईटीसी (ITC), एचसीएल टेक (HCL Tech), सन फार्मा (Sun Pharma) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) जैसी नामी कंपनियां इस सूची से बाहर हो चुकी हैं. इससे पहले सितंबर 2024 के बाद से एनटीपीसी (NTPC), मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) और टाटा मोटर्स (Tata Motors) भी इस ग्लोबल लिस्ट से बाहर का रास्ता देख चुकी थीं. जो 11 कंपनियां (एसबीआई और भारती एयरटेल सहित) लिस्ट में बची हैं, उनकी रैंकिंग में भी भारी गिरावट आई है.
बाजार में इस हाहाकार की असली वजह क्या है?
इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं है. यह कई वैश्विक और घरेलू कारकों का मिला-जुला असर है, जो सीधे तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था और आपके निवेश को प्रभावित कर रहा है:
- जियो-पॉलिटिकल तनाव: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तल्ख रिश्तों ने पूरी दुनिया के बाजारों का मूड बिगाड़ दिया है.
- कच्चे तेल की आग: इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85-90% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल का महंगा होना हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा जोखिम है.
- विदेशी निवेशकों की बेरुखी: भारतीय कंपनियों के महंगे वैल्युएशन और कमाई की सुस्त रफ्तार (अर्निंग ग्रोथ) के कारण विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं.
इन सभी वजहों से साल 2026 में अब तक सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) दोनों में 10-10 प्रतिशत से ज्यादा की टूट आ चुकी है. वहीं, बीएसई मिडकैप 9% और स्मॉलकैप 12% से अधिक फिसल चुके हैं.
दुनिया के नक्शे पर कहां ठहरता है भारत?
अगर ग्लोबल मार्केट कैप की बात करें, तो इस वक्त अमेरिका का भारी दबदबा कायम है. दुनिया की 500 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 254 अकेले अमेरिका की हैं. इसके बाद चीन (41), जापान (34), फ्रांस और कनाडा (20-20), ब्रिटेन (18) और जर्मनी (15) का नंबर आता है. भारत अब महज 11 कंपनियों के साथ इस सूची में काफी नीचे है.
दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों पर नजर डालें तो Nvidia $4.45 लाख करोड़ के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है. इसके बाद $3.71 लाख करोड़ के साथ Apple दूसरे और $3.7 लाख करोड़ के साथ Google तीसरे स्थान पर है. इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन, अरामको और मेटा प्लेटफॉर्म्स का नंबर आता है.
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