केरल में कांग्रेस ने सांसदों को नहीं दिया टिकट, गुटबाजी को साधने में कामयाब रही पार्टी

केरल में विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम के ऐलान का सिलसिला जारी है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आज शनिवार को 11 प्रत्याशियों की अपनी तीसरी लिस्ट जारी कर दी है. इससे पहले राज्य की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपने सभी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया. सत्ता में वापसी की कोशिशों में जुटी कांग्रेस लंबे समय से अंदरुनी संघर्ष से उलझी हुई थी, लेकिन टिकटों के ऐलान के दौरान वह उम्मीदवारों के चयन पर विवादों थामने में कामयाब होती दिख रही है.

कांग्रेस राज्य की 140 विधानसभा सीटों में से 92 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने पिछले दिनों 17 मार्च को अपनी पहली लिस्ट में 55 उम्मीदवारों की और दूसरी लिस्ट में शेष 37 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया. कांग्रेस ने इस बार किसी भी सांसद को मैदान में नहीं उतारा है. केरल में पार्टी विपक्षी गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बैनर पर चुनाव लड़ रही है.

आधा दर्जन सांसद मांग रहे थे टिकट

कांग्रेस राज्य की 92 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार रही है जबकि 3 सीटों पर उन बागी नेताओं का समर्थन कर रही है, जिन्होंने सीपीएम से अलग होने के बाद नया गुट बना लिया और चुनाव मैदान में उतर रहे हैं.

कहा जा रहा है कि कांग्रेस टिकट बंटवारे को लेकर सभी गुटों में संतुलन साधने में कामयाब रही है. साथ ही उसके लिए टिकटों का चयन आसान नहीं था क्योंकि 6 सांसद अपने लिए टिकट की मांग कर रहे थे. पार्टी नेतृत्व के सामने यह दुविधा थी कि अगर इन बड़े नेताओं को टिकट दिया जाता तो उनके सामने मुख्यमंत्री पद को लेकर नई समस्या खड़ी हो जाती, ऐसे में इन्हें टिकट दिए जाने से परहेज किया गया.

सांसदों को न लड़ाने के फैसले का सम्मानः अडूर

इस बीच UDF के संयोजक और कांग्रेस सांसद अडूर प्रकाश ने कहा कि पाथनमथिट्टा जिले के कोन्नी के लोग चाहते थे कि वे विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन पार्टी ने सांसदों को टिकट नहीं देने का फैसला लिया जिसका कि वह सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि वह 23 साल तक विधायक के तौर पर कोन्नी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

प्रकाश ने कहा, “मैं 23 साल तक कोन्नी के विधायक रहे, लेकिन पार्टी के निर्देश पर मैंने अटिंगल से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.” उनका कहना है, “कोन्नी के लोगों ने बार-बार मुझसे विधानसभा चुनाव लड़ने का अनुरोध किया. मैंने भी चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की थी, लेकिन यह इस शर्त पर था कि राष्ट्रीय नेतृत्व सांसदों को चुनाव लड़ने की छूट दे.” उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस के इस फैसले को स्वीकार करते हैं कि सांसदों को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.”

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