कौन हैं बाकेर जोलकद्र? लारिजानी की जगह बनाए गए ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव
मोहम्मद बाकेर जोलकद्र को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का नया सचिव बनाया गया है. उन्होंने अली लारीजानी की जगह ली है, जिनकी 17 मार्त को इजराइली हमले में मौत हो गई थी. यह जानकारी ईरानी राष्ट्रपति के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी. जोलकद्र इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर रह चुके हैं.
जोलकद्र का जन्म 1954 में ईरान के फासा शहर में हुआ था. 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में बैचलर डिग्री ली. उनकी पत्नी सदीगेह बेगम हेजाजी हैं, जो 2007 से ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कल्चर एंड कम्युनिकेशन में महिला और परिवार मामलों के कार्यालय की प्रमुख हैं. उनके दामाद काजेम गरीबाबादी वियना में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि हैं और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में भी देश का प्रतिनिधित्व करते हैं.
इस्लामी क्रांति के समय मंसूरून से जुडे़
1979 की इस्लामी क्रांति से पहले जोलकद्र ‘मंसूरून’ नाम के एक समूह से जुड़े थे. 1978 में उन पर और मोहसिन रेजाई पर एक अमेरिकी इंजीनियर और एक तेल कंपनी मैनेजर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगा था. बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1747 के तहत उन्हें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े होने के कारण प्रतिबंध सूची में भी डाला गया.
क्रांति के बाद मंसूरून समेत कई समूहों को मिलाकर एक संगठन बनाया गया, जिसने आगे चलकर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की खुफिया इकाई की नींव रखी. इस इकाई में जोलकद्र, रेजाई और अहमद वहीदी जैसे नेता अहम भूमिका में थे.
रमजान के भी कमांडर रहे
ईरान-इराक युद्ध (1980 से 1988) के दौरान जोलकद्र ब्रिगेडियर जनरल थे और टॉप कमांडरों में शामिल रहे. उन्हें मिलिट्री डिविजन रमजान गैरीसन के सह-संस्थापक और कमांडर के रूप में जाना जाता है. यह कैंप 1983 में बनाया गया था और इसका मुख्य काम ईरान के बाहर गतिविधियां चलाना था. बाद में यही ढांचा IRGC की विदेशी शाखा कुद्स फोर्स की नींव बना. गैरीसन का इस्तेमाल युद्ध के समय इराक में ईरान समर्थित समूहों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता था. इसने कई शिया संगठनों के साथ मिलकर काम किया.
21 साल तक IRGC में सर्विस दी
ईरान-इराक युद्ध खत्म होने के बाद जोलकद्र ने करीब 16 साल तक IRGC में ऊंचे पदों पर काम किया. 1989 से 1997 तक वे IRGC के जॉइंट स्टाफ के प्रमुख रहे, जो कमांड में तीसरे नंबर का पद था. इसके बाद 1997 से 2005 तक वे डिप्टी कमांडर इन चीफ बने, यानी दूसरे सबसे ताकतवर अधिकारी. उनकी तरक्की में मोहसिन रेजाई और रहीम सफवी से नजदीकी अहम रही. रेजाई 1981 से 1997 तक और सफवी 1997 से 2007 तक IRGC के प्रमुख रहे. रेजाई के समर्थन से जोलकद्र को जॉइंट हेडक्वार्टर का प्रमुख बनाया गया और सफवी के समय उनकी स्थिति और मजबूत हुई.
उसी दौर में मोहम्मद खातमी राष्ट्रपति बने. जोलकद्र, सफवी और मोहम्मद रजा नकदी ने मिलकर सुधारवादी नेताओं का विरोध किया. जोलकद्र पर 9 जुलाई 1999 को यूनिवर्सिटी हॉस्टल पर हमले में शामिल होने का आरोप लगा. उन्होंने 24 सैन्य अधिकारियों के उस पत्र पर भी हस्ताक्षर किए, जिसमें राष्ट्रपति खातमी को चेतावनी दी गई थी. रुहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद 1989 में अली खामेनेई सत्ता में आए. उन्होंने सेना में बड़े बदलाव किए और जोलकद्र को IRGC जॉइंट चीफ्स का प्रमुख बनाया था.
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