अब भारत में होगी एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों की जांच, केंद्र सरकार खोलेगी टेस्टिंग सेंटर

हवाईअड्डों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भारत सरकार ने ‘जांच केंद्र’ स्थापित करने का फैसला किया है. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के बीच हुए समझौते के तहत टेस्टिंग सेंटर में एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाले फुल बॉडी स्कैनर (FBS) और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच, मूल्यांकन और प्रमाणन किया जाएगा.

जानकारी के मुताबिक आरआरयू (RRU) और बीसीएएस (BCAS) मिलकर एक अत्याधुनिक जांच केंद्र स्थापित करेंगे, जहां एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों की जांच, सेफ्टी, शोध, प्रशिक्षण, स्टैंडर्ड डेवलपमेंट और इंटरऑपरेबिलिटी का कड़ा परीक्षण होगा. यह केंद्र मूल उपकरण निर्माता (OEMs) द्वारा बनाए गए उपकरणों की स्वतंत्र जांच और सत्यापन करेगा और फिर इसके मूल्यांकन के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.

आत्मनिर्भर भारत’ की ओर कदम

केंद्रीय नागरिक विमान्न मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यह समझौता सरकार के सिक्योरिटी रिसर्च और क्षमता निर्माण के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा के क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन और क्षमता निर्माण पर लगातार जोर दिया जा रहा है. इस कदम का मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भर और आत्म-सुरक्षित भारत का निर्माण है. अब भारत को भी सिर्फ विदेशी प्रमाणन मानकों का पालन करने के बजाय खुद को एविएशन सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.

भारत में ही विकसित होंगे भारत स्टैंडर्ड्स

समझौते के तहत मूल उपकरण निर्माता (OEMs) को अपने उत्पादों के जांच और प्रमाणन के लिए देश में ही सुविधाएं मिलेंगी. यह भारत स्टैंडर्ड्स बनाने में सहायक होगा और विदेशों निर्भरता कम करना है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीसीएएस की नियामक ताकत और आरआरयू की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर एक ऐसा इंडिजिनस इकोसिस्टम तैयार करेगी, जो अमेरिका के टीएसए (TSA) और यूरोप के ईसीएसी (ECAC) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर होगा.

शोध, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट पर जोर

नागरिक विमान्न मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेस्टिंग प्रयोगशाला बनाई जाएंगी, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी. यहां उपकरणों की गहन जांच के साथ-साथ एक मजबूत एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क भी बनाया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल मानकों पर खरे उतरने वाले उपकरण ही एयरपोर्ट पर तैनात किए जाएं.

इसके अलावा, एमओयू में शोध, एकेडमिक्स, प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया है. वर्कशॉप, स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम और नॉलेज शेयरिंग के जरिए इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित की जाएगी.

सुरक्षा की बढ़ी जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2014 तक देश में 74 एयरपोर्ट थे, जो अब बढ़कर 165 हो गए है. हर घंटे देश के एयरपोर्ट्स पर 250300 फ्लाइट मूवमेंट हो रहे हैं और करीब 4045 हजार यात्री यात्रा कर रहे हैं. एयर कार्गो में भी पिछले एक दशक में करीब 50% की बढ़ोतरी देखी गई है.

उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट संचालन में उच्च स्तर की तकनीक और प्रोफेशनल दक्षता अपनाना बेहद जरूरी है. बीसीएएस और आरआरयू के बीच यह समझौता इसी दिशा में एक कदम है, जो भारत को भविष्य के लिए तैयार और सुरक्षित एविएशन सिस्टम देने में मदद करेगा.

बीसीएएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत एविएशन सुरक्षा उपकरणों के टेस्टिंग और प्रमाणन का वैश्विक केंद्र बने और तेजी से बढ़ रहे विमानन क्षेत्र की सुरक्षा और मजबूत हो सके. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन है एविएशन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्लोबल हब के रूप में विकसित करना. इस दिशा में नागरिक विमान्न मंत्रालय लगातार कदम उठा रहा है. बीते दिनों भारत को ग्लोबल मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग (MRO) का हब बनाने के लिए कदम उठाए गए और अब यह फैसला लिया गया है, जो इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत को पहचान दिलाएगा.

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