सीजफायर पर किरकिरी के बाद अमेरिका मारने लगा यू-टर्न, व्हाइट हाउस ने कहा-ईरान की इच्छाएं कभी स्वीकार नहीं करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया. इस सीजफायर को ईरान ने अपनी जीत के तौर पर पेश कर रहा है, इसके अलावा बिना ऑब्जेक्टिव पूरा किए सीजफायर करने पर अमेरिका की पूरी दुनिया में किरकिरी हो रही है. ईरान ने कहा कि उसने 10 शर्ते रखी हैं, जिनको मानने के बाद ये सीजफायर किया गया है, लेकिन अमेरिका इससे यू-टर्न लेता दिख रहा है.

ट्रंप की स्पोक्सपर्सन कैरोलिन लेविट ने बुधवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजराइली युद्ध में सीजफायर के आधार के तौर पर ईरान का पेश किया गया 10-पॉइंट का प्रपोजल, तेहरान सरकार के पब्लिश किए गए प्रपोजल से अलग है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी ईरान की विश लिस्ट को डील के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे. वह सिर्फ वही डील करेंगे जो अमेरिकी लोगों के सबसे अच्छे हित में हो.

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम को एनरिच करने के अधिकार के साथ-साथ बैन में छूट और ईरान पर हमलों को हमेशा के लिए खत्म करने को मानेगा. लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति की रेड लाइन यानी ईरान में ईरानी एनरिचमेंट का खत्म होना, नहीं बदली हैं.” वहीं लेबनान मसले पर भी अमेरिका पीछे हट रहा है.

लेबनान हमलों ने किया सीजफायर को कमजोर

अमेरिका उस पाइंट से भी पीछे हट गया है, जिसमें सीजफायर में लेबनान को भी शामिल किया गया था. सीजफायर के बाद इजराइल ने लेबनान पर अपने हमले और तेज कर दिए, 10 मिनट के भीतर एक साथ करीब 100 ठिकानों पर IDF ने स्ट्राइक की. जिसमें 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि लेबनान को अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर में शामिल नहीं किया गया था, जो पाकिस्तान के दावे के उलट है. हालांकि ट्रंप पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उस पोस्ट को रिपोस्ट किया था, जिसमें ये साफ तौर पर लिखा था कि लेबनान भी सीजफायर में शामिल है.

क्या नहीं टिक पाएगा सीजफायर?

लेबनान में हमले और अमेरिका के यू-टर्न के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाक प्रधानमंत्री के ट्वीट को हाईलाइट करते हुए लिखा, “ईरान-अमेरिका सीजफायर की शर्तें साफ हैं. अमेरिका को चुनना होगा कि सीजफायर या इजराइल के ज़रिए युद्ध जारी रखना. वह दोनों नहीं चुन सकता. दुनिया लेबनान में हो रहे नरसंहार देख रही है. गेंद अमेरिका के पाले में है और दुनिया देख रही है कि वह अपने वादों पर काम करेगा या नहीं.”

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