पुणे एयरपोर्ट पर एयरफोर्स के विमान की हार्ड लैंडिंग, जानें क्या और क्यों होती है ये?
भारतीय वायुसेना (IAF) के फाइटर जेट की पुणे एयरपोर्ट पर ‘हार्ड लैंडिंग’ कराई गई. लैंडिंग के दौरान विमान के अंडरकैरिज में खराबी आ गई, जिसकी वजह से विमान रनवे पर अटक गया और पूरा रनवे ब्लॉक हो गया. अंडरकैरिज एक लैंडिंग गियर है. फिलहाल, इसको चलाने वाला पायलट पूरी तरह से सुरक्षित है. IAF की तरफ से इसकी जानकारी दी गई. पुणे हवाई अड्डे पर IAF के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण रनवे पर परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. राहत की बात है कि किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. कई बार तकनीकि, खराब मौसम और अन्य दूसरी वजहों से विमान चालक को हार्ड लैंडिंग करानी पड़ती है. हार्ड लैंडिंग से इस विमान को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाया जा सका. ऐसे में जानते हैं ये हार्ड लैंडिंग क्या है, जिसकी मदद से ऐसे बहुत से हादसों को रोकने में मदद मिलती है.
नॉर्मल स्थिति में किसी भी विमान की लैंडिंग रनवे पर बहुत धीरे-धीरे होती है, लेकिन हार्ड लैंडिंग किसी आपातकालीन स्थिति में होती है. हार्ड लैंडिंग के समय विमान रनवे पर बहुत तेजी और नीचे की ओर जोर से उतरता है. स्पीड तेज होने झटका भी बहुत तेज लगता है और जोर की आवाज सुनाई देती है.
हार्ड लैंडिंग की सबसे खास बात क्या है?
वर्टिकल स्पीड
हार्ड लैंडिंग में अक्सर, टचडाउन के समय नीचे उतरने की दर या वर्टिकल स्पीड, एक स्मूथ और कंट्रोल्ड लैंडिंग के लिए जरूरी स्पीड से ज्यादा होती है. नीचे उतरने की यह बढ़ी हुई दर रनवे की सतह पर ज्यादा जोरदार टक्कर का कारण बन सकती है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो सकती है और विमान के ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में इस नुकसान से बचाने में वर्टिकल स्पीड बहुत मदद करती है.
बढ़ी हुई टक्कर की ताकत
हार्ड लैंडिंग में आमतौर पर, टचडाउन के समय ज्यादा वर्टिकल स्पीड के कारण, विमान के लैंडिंग गियर और रनवे की सतह के बीच टक्कर की ताकत बहुत ज्यादा होती है. ये ताकतें लैंडिंग गियर और एयरफ्रेम की डिजाइन सीमाओं से ज्यादा हो सकती हैं. इससे ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है या उसके पुर्जों पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है.
सुनाई देने वाली टक्कर
कुछ मामलों में, हार्ड लैंडिंग के साथ कुछ आवाजें भी सुनाई दे सकती हैं, जैसे कि जोरदार ‘धड़ाम’, ‘बैंग’ या ‘चीख’ जैसी आवाज, जब विमान रनवे से टकराता है. ये आवाजें विमान के लैंडिंग गियर के पुर्जों या ढांचे के तत्वों पर बहुत ज्यादा ताकत या दबाव का संकेत हो सकती हैं.
उछलने की संभावना
के बाद जोरदार लैंडिंग के बाद, विमान में उछाल या रीबाउंड का असर दिख सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शुरुआती टचडाउन के दौरान जमा हुई अतिरिक्त ऊर्जा के कारण विमान रनवे की सतह से टकराकर वापस ऊपर उछलता है. उछाल की वजह से लैंडिंग रोलआउट का समय बढ़ सकता है और लैंडिंग गियर या एयरफ्रेम पर अतिरिक्त दबाव पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
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