BSP फिर खाली हाथ, आकाश आनंद की अगुवाई में 3 राज्यों में नहीं चला जादू, वोट शेयर भी सिमटा
देश के 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम आ गए हैं, इसमें से 3 में सत्ता परिवर्तन हो गया है. तमिलनाडु में नई नवेली पार्टी (TVK) सत्ता में आ गई है. लेकिन बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए बुरे दिन खत्म नहीं हो रहे हैं. बीएसपी ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तीनों ही राज्यों में उसे करारी शिकस्त मिली. खाता खोलने की बात तो दूर पार्टी को इन तीनों राज्यों में 1 फीसदी वोट भी नहीं मिल सका.
देश के 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम आ गए हैं, इसमें से 3 में सत्ता परिवर्तन हो गया है. तमिलनाडु में नई नवेली पार्टी (TVK) सत्ता में आ गई है. लेकिन बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए बुरे दिन खत्म नहीं हो रहे हैं. बीएसपी ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तीनों ही राज्यों में उसे करारी शिकस्त मिली. खाता खोलने की बात तो दूर पार्टी को इन तीनों राज्यों में 1 फीसदी वोट भी नहीं मिल सका.
मायावती पार्टी में संगठन मजबूत करने, दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने और युवा चेहरा आकाश आनंद को आगे बढ़ाने की रणनीति में लगी थीं, लेकिन चुनाव परिणाम में यह रणनीति पूरी तरह फेल हो गई. पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद समेत उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने जमकर प्रचार किया, ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां भी कीं, लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे.
भीड़ जुटने के बाद भी BSP का नहीं खुला खाता
पश्चिम बंगाल में आकाश आनंद की रैली में अच्छी खासी भीड़ जुटने के बावजूद पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका. तीनों राज्यों में बीएसपी का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा. बीएसपी के खाते में पश्चिम बंगाल में 0.18% वोट मिले तो तमिलनाडु में 0.11% वोट और केरल में 0.15% वोट ही आए.
पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में तीनों राज्यों में बीएसपी ने संगठन विस्तार पर जोर दिया था. दलितों के साथ अल्पसंख्यक वोटों को जोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन आंतरिक भितरघात, पदाधिकारियों की लापरवाही और समन्वय की कमी ने सारी तैयारी पर पानी फेर दिया. खास बात यह कि इन चुनावों में पार्टी प्रमुख मायावती ने खुद प्रचार अभियान से दूरी बनाए रखी.
पिछले चुनाव में भी 0 पर रही थी पार्टी
जबकि पिछले पश्चिम बंगाल चुनाव में मायावती ने खुद कई जनसभाएं की थीं और 200 से ज्यादा प्रत्याशी भी उतारे थे. तब भी पार्टी को कोई खास फायदा नहीं हुआ था. इस बार मायावती की अनुपस्थिति को भी पार्टी की नाकामी की एक बड़ी वजह माना जा रहा है.
बीएसपी दक्षिण भारत में भी अपनी जड़ें जमाना चाह रही थी, लेकिन वहां उसके लिए कामयाबी हासिल करना दूर की बात लग रही है. पूरे बंगाल में उसे 0.11 फीसदी यानी 53,369 वोट ही मिले.
बिहार में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बीएसपी को एक सीट पर जीत हासिल हुई थी, और इस कामयाबी से पार्टी को कुछ उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में उसे फिर निराशा हाथ लगी. इसी तरह तमिलनाडु और केरल में भी कुछ सीटों पर जीत की उम्मीद थी, लेकिन यह हासिल नहीं हो सकी है.
हालिया चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि बीएसपी को खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में अपनी जड़ें जमाने के लिए लंबी और कड़ी मशक्कत करनी होगी. वर्तमान में पार्टी का वोट बैंक इन राज्यों में नगण्य सा रह गया है.
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