दिल्ली से दुनिया को 5 संदेश, BRICS के मंच पर जयशंकर ने क्या-क्या कहा?

नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने गुरुवार को साफ संकेत दिया कि दुनिया जिस अस्थिर दौर से गुजर रही है, उसमें सिर्फ़ सैन्य शक्ति या प्रतिबंध समाधान नहीं हो सकते. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखते हुए एक साथ कई बड़े संदेश दिए. पश्चिम एशिया से लेकर आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, प्रतिबंधों की राजनीति और संयुक्त राष्ट्र सुधार तक.

जयशंकर के बयान में सबसे अहम फोकस पश्चिम एशिया की स्थिति पर दिखा. उन्होंने सीधे तौर पर Strait of Hormuz और Red Sea का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्री रास्तों में बाधा और ऊर्जा ढांचे पर खतरे पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे समय में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह बेहद जरूरी है. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान संकट और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार वैश्विक चिंता बना हुआ है.

भारत ने बैठक में गाजा का मुद्दा भी उठाया और साफ कहा कि मानवीय संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारत ने सीजफायर, मानवीय पहुंच और दो राष्ट्र सिद्धांतt का समर्थन दोहराया. इसके साथ ही लेबनान, सीरिया, सुडान, यमन और लीबिया का जिक्र कर भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि क्षेत्रीय अस्थिरता अब सीमित भौगोलिक मुद्दा नहीं रह गई, बल्कि उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है.

एकतरफा प्रतिबंध के खिलाफ संदेश

दिलचस्प बात यह रही कि जयशंकर ने unilateral sanctions यानी एकतरफा प्रतिबंधों पर भी अप्रत्यक्ष लेकिन तीखा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और UN Charter के खिलाफ लगाए गए दंडात्मक उपाय विकासशील देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं और दबाव की राजनीति संवाद का विकल्प नहीं हो सकती. BRICS मंच पर यह बयान पश्चिमी प्रतिबंधों की नीति पर भारत की लगातार बनी हुई असहजता को भी दिखाता है.

आतंकवाद पर भारत ने अपना पारंपरिक लेकिन सख्त रुख दोहराया. जयशंकर ने कहा कि cross-border terrorism अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है और आतंकवाद के प्रति zero tolerance सार्वभौमिक मानक होना चाहिए. ऐसे समय में जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है, यह टिप्पणी भी कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

यूएन रिफॉर्म को अब टाला नहीं जा सकता है

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुधार का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियां दिखाती हैं कि multilateral system कमजोर पड़ रहा है और UNSC reform अब टाला नहीं जा सकता. भारत लंबे समय से Security Council में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और BRICS जैसे मंचों पर इस मुद्दे को लगातार आगे बढ़ाता है.

पूरे भाषण का केंद्रीय संदेश यही था कि दुनिया fragmented geopolitics के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक दबाव, तकनीकी असमानता और climate crisis एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं. भारत ने खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश करने की कोशिश की जो confrontation के बजाय dialogue, diplomacy और inclusive global order की वकालत करता है.

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