आंध्र प्रदेश बनेगा ड्रोन हब! केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू और DFI अध्यक्ष की बड़ी बैठक

भारत को साल 2030 तक ‘ग्लोबल ड्रोन हब’ बनाने की दिशा में आंध्र प्रदेश बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. हाल ही में ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के अध्यक्ष स्मित शाह ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू से मुलाकात की. इस बैठक का मुख्य एजेंडा आंध्र प्रदेश को ड्रोन इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च (R&D) का केंद्र बनाना था.

बैठक की मुख्य बातें

  1. नई ड्रोन पॉलिसी: बैठक में आंध्र प्रदेश के लिए एक ‘ड्रोन पॉलिसी’ पर चर्चा हुई. इसका उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाना, स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है.
  2. ​रोजगार के नए अवसर: ड्रोन उद्योग के जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर स्किलिंग और युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया.
  3. ​इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग: राज्य में ड्रोन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेस्टिंग सेंटर और सरकारी प्रोत्साहन (Incentives) देने पर बात हुई.

​इन क्षेत्रों में होगा ड्रोन का बड़ा इस्तेमाल

​चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि कैसे ड्रोन आम जनता के जीवन में बदलाव ला सकते हैं. इसके लिए कुछ प्रमुख सेक्टर चुने गए हैं:

  • कृषि: फसलों की निगरानी और छिड़काव के लिए
  • कानून व्यवस्था: पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए
  • स्वास्थ्य सेवा: दवाओं और इमरजेंसी मेडिकल किट की डिलीवरी के लिए
  • आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए

​क्यों खास है आंध्र प्रदेश?

सूत्रों के मुताबिक, भारत का ड्रोन मार्केट 2030 तक 11 अरब डॉलर का हो सकता है. अपनी भौगोलिक स्थिति और सरकार के सक्रिय सहयोग के कारण आंध्र प्रदेश इस इंडस्ट्री का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है.

ड्रोन पावर: उभरती हुई स्वदेशी इंडस्ट्री

बता दें कि ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) एक प्रमुख उद्योग संगठन है, जो 550 से ज्यादा ड्रोन कंपनियों और 5,500 ड्रोन पायलटों को लीड करता है. इसका लक्ष्य 2030 तक देश को एक वैश्विक ड्रोन हब बनाना है. साथ ही यह दुनिया भर में भारतीय ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों के डिजाइन, विकास, निर्माण, उपयोग और निर्यात को बढ़ावा देता है.

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