बार-बार चेतावनी और रख-रखाव के टिप्स के बाद भी AC में आग लगने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?
गर्मियों में एसी हमारी जरूरत बन गया है, लेकिन इसकी वजह से इन दिनों आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सोमवार 29 जून 2026 की सुबह दिल्ली से सटे नोएडा की एक हाई राइज सोसाइटी में एसी ब्लास्ट की वजह से कई फ्लैट्स जलकर खाक हो गए। इससे पहले भी दिल्ली के मालवीय नगर के होटल में एसी ब्लास्ट के कारण दर्दनाक अग्निकांड हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। वहीं, विवेक विहार में भी एसी ब्लास्ट के कारण एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई थी।
एसी ब्लास्ट की वजह से होने वाले अग्निकांड की मुख्य वजह केवल खराब रख-रखाव या मेनटेनेंस नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई और भी कारण हैं, जिनपर बहुत कम लोगों का ध्यान जाता है। दिल्ली-एनसीआर में कई ऐसे रेसिडेंशियल और कमर्शियल बिल्डिंग्स हैं, जिनमें किसी भी तरह की फायर सेफ्टी नहीं है या फायर सेफ्टी को फॉलो नहीं किया गया है। पिछले दिनों आग लगने की घटनाओं के बाद की गई जांच में कई ऐसी इमारतें सामने आई हैं, जहां प्रॉपर फायर सेफ्टी लगा ही नहीं है। यही कारण है कि आग तेजी से फैल जाता है। आइए, जानते हैं एसी में आग लगने की मुख्य वजह क्या है?
खराब या लूज वायरिंग
एयर कंडीशनर के लिए ज्यादा एम्पीयर लोड की जरूरत होती है। हाई पावर की वजह से इसे लगवाते समय इलेक्ट्रिकल वायरिंग का ध्यान रखना चाहिए। आम तौर पर घरों में 1 या 1.5 टन का एसी लगाया जाता है, जिसके लिए कम से कम 4 एम्पीयर वाली वायरिंग अनिवार्य है।
खराब और लूज वायरिंग की वजह से भी शॉर्ट-सर्किट होने का खतरा रहता है, जो बड़े अग्निकांड में तब्दील हो सकता है। पुराने हो चुके मकानों की वायरिंग भी पुरानी और जर्जर अवस्था में रहती है। ऐसे में एसी लगवाने से पहले वायरिंग की जांच बेहद जरूरी है।
यही नहीं, वायरिंग करते समय इलेक्ट्रिशियन द्वारा खराब मटीरियल का इस्तेमाल भी शॉर्ट सर्किट को दावत देता है। खास तौर पर कई बिल्डर्स फ्लोर में खराब मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ समय के बाद जब ये वायरिंग जर्जर हो जाती है, शॉर्ट सर्किट की घटना घट सकती है।
- एसी के लिए यूज करें हैवी वायरिंग।
- लूज और पुरानी वायरिंग को तुरंत बदलवाएं।
- वायरिंग में हमेंशा ISI मार्क वाले वायर का ही इस्तेमाल करें।
खराब मेनटेनेंस
लूज और जर्जर वायरिंग के अलावा एसी की मेनटेनेंस में की जाने वाली अनदेखी भी ब्लास्ट का कारण बनती है। एसी के कूलिंग क्वॉइल को अगर समय-समय पर साफ नहीं किया गया तो यह कंप्रेसर को ओवरहीट कर सकता है, जिसकी वजह से इसमें आग लगने की संभावना रहती है। ऐसे में एसी की सर्विसिंग समय-समय पर करवाते रहना चाहिए।
एसी में इस्तेमाल किए जाने वाले रेफ्रिजेंट या कूलिंग गैस के लीक होने की वजह से भी आग लग सकती है क्योंकि इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला रेफ्रिजेंट बेहद ज्वलनशील होता है, जो तेजी से आग फैला सकता है।
- समय-समय पर करें सर्विसिंग।
- कूलिंग क्वॉइल रखें साफ।
- गैस लीक का रखें ध्यान।
इंस्टालेशन में की गई गलती
जब भी आप अपने घरों में एसी लगवाते हैं तो इंस्टॉलेशन के दौरान की गई कुछ गलतियां भी इसमें ब्लास्ट का कारण बनती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आपने एसी का आउटडोर यूनिट ऐसी जगह लगवा दिया है, जहां उसे प्रॉपर वेंटिलेशन नहीं मिल रहा है तो उसके ओवरहीट होने की संभावना रहती है। साथ ही, इससे कूलिंग की समस्या भी आती है।
इन दिनों आने वाल ज्यादातर एसी ब्लास्ट के मामलों में देखा गया है कि एसी का आउटडोर यूनिट सीढ़ियों पर लगा दिया गया है। ऐसा करना बेहद खतरनाक है क्योंकि इसमें यूनिट को वेंटिलेशन भी नहीं मिलता है और सीढ़ियों पर लगाए जाने की वजह से आग लगने के बाद लोग सीढ़ियों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और बचकर बाहर निकलने में दिक्कत आती है।
- आउटडोर यूनिट की प्लेसिंग का रखें ध्यान।
- आउटडोर यूनिट को चाहिए प्रॉपर वेंटिलेशन।
- सीढ़ियों पर आउटडोर यूनिट न लगवाएं।
एसी इस्तेमाल करने में गलती
जी हां, जितनी ज्यादा गर्मी पड़ेगी, उतना ही एसी में आग लगने की संभावना भी बढ़ेगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि ज्यादा गर्मी होने की वजह से लोग अपने एसी को 16 या 17 पर चलाते हैं ताकि कमरा ठंडा रह सके। ऐसा करने से कंप्रेसर पर ज्यादा लोड पड़ता है और एसी में ब्लास्ट हो सकता है।
कितनी भी गर्मी क्यों न पड़े कभी भी आपको एसी को 24 से नीचे नहीं चलाना चाहिए। ऐसा करने से आपको दो तरह के फायदे होंगे। पहला फायदा ये की एसी का कंप्रेसर ओवरहीट नहीं होगा और दूसरा आपका बिजली का बिल कम आएगा। 24 से जितने डिग्री कम में आप एसी चलाएंगे, उतना ही ज्यादा बिजली का यूनिट बढ़ेगा। ऐसे में आपको एसी को मॉडरेट टेम्परेचर 24 या 26 पर चलाना चाहिए।
एसी को लगातार चलाना भी हानिकारक है। ऐसे में हो सके तो आप एसी को ऑटो मोड में चलाएं। नए इन्वर्टर वाले एसी में ऑटो मोड इस्तेमाल करने पर कमरा ठंडा होते ही कंप्रेसर अपने आप स्वीच ऑफ हो जाता है। ऐसे में इसके ओवरहीट की संभावना नहीं रहती है। साथ ही, बिजली का बिल भी कम हो जाता है।
यही नहीं, जिस कमरे में एसी लगा है, उसमें पूरी तरह से इंसुलेशन होना चाहिए, ताकि एसी को कमरा ठंडा करने में ज्यादा समय न लगे। जिस कमरे में धूप आती है, वहां एसी को कमरा ठंडा करने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में कंप्रेसर केओवरहीट होने की संभावना रहती है।
- एसी को लगातार लंबे समय तक न चलाएं।
- ऑटो मोड का करें इस्तेमाल।
- तापमान 24 डिग्री से कम न रखें।
- एसी लगाए जाने वाले कमरे में होना चाहिए बेहतर इंसुलेशन।
क्यों बढ़ रही आग लगने की घटनाएं?
एसी ब्लास्ट के कारण आग लगने की घटनाओं के बढ़ने की इन सभी वजहों के अलावा एक और मुख्य वजह लचर फायर सेफ्टी कम्प्लायेंस है। दिल्ली और एनसीआर में ऐसे कई रेसिडेंशियल और कमर्शियल बिल्डिंग हैं, जिनमें फायर सेफ्टी सिस्टम है ही नहीं या फिर उन्हें फॉलो नहीं किया जा रहा है।
आग लगने की बढ़ रही घटनाओं के बीच नोएडा फायर सर्विस की तरफ से सभी सोसाइटी और RWA को नोटिस दिया गया है कि वह अपनी सोसाइटी की सेल्फ सेफ्टी रिपोर्ट दे जिसमें यह पता चल सके कि किस बिल्डिंग में फायर अलार्म, वॉटर स्प्रिंकलर मशीन, फायर एक्सटिंग्विशर काम कर रहा है कि नहीं? वहीं, दिल्ली सरकार की तरफ से भी सभी होटल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और RWA को फायर सेफ्टी को लेकर गाइडलाइंस जारी की गई है।
