समोसे-कचौड़ी के बीच गायब होती रहीं नोटों की गड्डियां, राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब सिर्फ एक आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि काउंटिंग रूम के अंदर चल रही ‘अनियमित पार्टियों’ और लापरवाही भरे सिस्टम की कहानी बनता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि जहां चढ़ावे के नोटों की गिनती होनी थी, वहां समोसे और कचौड़ियों की महंगी दावतें चलती थीं। इसी माहौल के बीच चढ़ावे की रकम के गायब होने का खेल चलता रहा। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए जेल में बंद आरोपियों से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक हर कड़ी को खंगाल रही है।
अविनाश शुक्ला से हुई लंबी पूछताछ
मामले में जेल में बंद अविनाश शुक्ला से पुलिस ने करीब 2 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उससे कई अहम सवाल किए गए, जिनमें यह जानने की कोशिश की गई कि उसके पास लाखों रुपये कहां से आए, वह मंदिर में कब से काम कर रहा था और क्या उसने शुरुआत से ही गड़बड़ी शुरू कर दी थी। पुलिस ने उससे यह भी पूछा कि मंदिर से चढ़ावे की रकम बाहर कैसे ले जाई जाती थी, क्या इसके लिए कपड़ों, जूतों या किसी खास तरीके का इस्तेमाल किया जाता था, और क्या उसकी पत्नी भी इस पूरे मामले में शामिल थी।
काउंटिंग रूम में समोसे-कचौड़ी की पार्टियां
काउंटिंग रूम में एक शिफ्ट में करीब 22 लोग काम करते थे, लेकिन न तो सख्त फ्रिस्किंग होती थी और न ही ड्रेस कोड का पालन। कर्मचारी डबल जेब वाले कपड़े पहनकर आते थे और जूते-मोजे पहनकर ही नोटों की गिनती करते थे। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान काउंटिंग रूम में समोसे और कचौड़ियों की दावतें चलती रहती थीं। चढ़ावे की रकम से ही पैसे निकालकर कभी 800 तो कभी 1000 रुपये के समोसे और कचौड़ियां मंगाई जाती थीं। ऐसे ही माहौल में नोटों की गड्डियां कपड़ों, मोजों और जूतों में छुपाकर बाहर निकालने के आरोप सामने आए हैं।
बिना जांच और फ्रिस्किंग के चलता रहा पूरा सिस्टम
जांच में यह भी सामने आया है कि काउंटिंग रूम में किसी भी तरह की सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं थी। न तो एंट्री पर फ्रिस्किंग होती थी और न ही यह सुनिश्चित किया जाता था कि कर्मचारी बिना जेब वाले कपड़े पहनें। बार-बार बाहर आने-जाने पर भी कोई रोक नहीं थी। इसी ढीली व्यवस्था का फायदा उठाकर नोटों की गड्डियों के गायब होने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि यह केवल लापरवाही थी या इसके पीछे एक संगठित तरीका काम कर रहा था।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल, नियम बदलने के आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि काउंटिंग और निगरानी की जिम्मेदारी क्रमशः अनिल मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव के पास थी। आरोप है कि निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले सुभाष श्रीवास्तव ने खुद को संगठन से जुड़ा बताकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा जांच के नियमों में बदलाव कर दिए गए। इसके बाद नियमित चेकिंग लगभग बंद हो गई और सिर्फ कभी-कभी अचानक जांच की व्यवस्था रह गई। पुलिस अब इस बदलाव को भी मामले से जोड़कर देख रही है।
ट्रस्ट, बयान और SBI की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस चंपत राय के बयान और ट्रस्ट परिसर में हुई छापेमारी के दौरान मिले कैश और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। इन सभी सबूतों को जोड़कर पूरे मामले की कड़ी तैयार की जा रही है। इसके अलावा मंदिर में चढ़ावे के कैश के प्रबंधन की जिम्मेदारी SBI को दी गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में बैंकिंग प्रक्रिया में लापरवाही के संकेत मिले हैं। इसी कारण SBI के कुछ कर्मचारी भी अब पुलिस जांच के दायरे में हैं।
