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48 घंटे के अंदर एक ही परिवार के 3 मासूमों की मौत, बुखार ने ली जान; हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग

सबसे पहले मंजू को आया था तेज बुखार

अधिकारियों के मुताबिक, सबसे पहले 7 वर्षीय मंजू को करीब एक हफ्ता पहले तेज बुखार हुआ। गांव के निजी डॉक्टर से इलाज कराया लेकिन फायदा नहीं हुआ। फिर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां बुधवार को उसकी मौत हो गई। मंजू की मौत के तुरंत बाद उसकी 3 वर्षीय छोटी बहन खुशी को भी तेज बुखार चढ़ गया। हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल से गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन शुक्रवार सुबह वहां उसने भी दम तोड़ दिया।

3 बच्चों की मौत से गांव में फैली दहशत

2 मासूमों की मौत से टूट चुके परिवार को इसी बीच पर तीसरा झटका तब लगा जब दशरथ का 5 वर्षीय बेटा कृष्णा भी बुखार की चपेट में आ गया। उसे इलाज के लिए पड़रौना ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। एक ही परिवार में तीन बच्चों की लगातार मौत से पूरे गांव में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लिया। नेबुआ नौरंगिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के प्रभारी डॉ. रंजन कुमार मौर्या ने बताया कि पिछले 2 दिनों से गांव में मेडिकल कैंप लगा हुआ है।

गांव में कीटनाशक दवा का छिड़काव

टीम ने अब तक 57 बच्चों की जांच की है और मलेरिया-डेंगू जैसे बीमारियों के टेस्ट किए हैं। जरूरत के हिसाब से दवाइयां भी बांटी जा रही हैं। डॉ. मौर्या ने कहा, 'तीनों बच्चों की मौत की असली वजह अभी मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगी। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।' स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया है, ब्लीचिंग पाउडर डाला है और लोगों को साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। फिलहाल गांव में मातम पसरा हुआ है और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है ताकि ऐसे और हादसे न हों।