NEET-UG परीक्षा में सुधार के लिए दिए गए 101 सुझाव, NTA ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दी जानकारी
NEET-UG परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने कई बड़े कदम उठाए हैं। यह जानकारी पूर्व ISRO प्रमुख और NTA सुधार समिति के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दी है। हलफनामे में बताया गया है कि साल 2024 में NEET-UG परीक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई थी। इस समिति ने NTA की परीक्षा व्यवस्था, डेटा सुरक्षा और कामकाज में सुधार के लिए 101 सुझाव दिए थे।
निगरानी के लिए बनाई गई कमेटी
डॉ. राधाकृष्णन ने बताया कि इन सुझावों को लागू करने की निगरानी के लिए एक हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई। समिति लगातार NTA द्वारा किए जा रहे सुधारों की समीक्षा कर रही है। हलफनामे के अनुसार, NEET-UG 2025 और 2026 में राज्यों की भूमिका बढ़ाई गई। राज्य और जिला स्तर पर समितियां बनाई गईं, जिन्होंने परीक्षा केंद्रों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई। 2026 की NEET-UG परीक्षा के 99.5 प्रतिशत से ज्यादा केंद्र सरकारी संस्थानों में बनाए गए।
16 नए पद बनाए गए
परीक्षा केंद्रों के चयन को भी ज्यादा व्यवस्थित बनाया गया है। कोशिश की जा रही है कि छात्रों को उनके जिले में ही परीक्षा केंद्र मिले। किसी भी असामान्य पैटर्न की पहचान के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। हलफनामे में कहा गया है कि NTA को मजबूत करने के लिए 16 नए पद बनाए गए हैं। इसके अलावा IIT, UGC और केंद्रीय विद्यालय संगठन जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है। परीक्षा की सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच के लिए तय प्रक्रिया लागू की गई है। परीक्षा कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
कई स्तर की जांच व्यवस्था
डॉ. राधाकृष्णन ने बताया कि उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन शुरू किया गया है। यह "डिजी-एग्जाम" व्यवस्था की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए कई स्तर की जांच व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी केंद्र स्तर पर की जाती है। साथ ही मोबाइल सिग्नल रोकने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं।
बनाए गए हेल्पडेस्क और कॉल सेंटर
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि परीक्षा के बाद डेटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध गतिविधियों और किसी भी तरह की गड़बड़ी की पहचान की जाती है। शिकायतों के निपटारे के लिए हेल्पडेस्क और कॉल सेंटर भी काम कर रहे हैं। NTA शिकायत निवारण प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीक जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
सुधारों की प्रक्रिया आगे भी जारी
हालांकि, NEET-UG को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने, कई चरणों में परीक्षा कराने और उम्र सीमा जैसे मुद्दों पर अंतिम फैसला अभी स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। हलफनामे में दावा किया गया है कि NEET-UG 2025 परीक्षा विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करते हुए सफलतापूर्वक आयोजित की गई और सुधारों की प्रक्रिया आगे भी जारी है।
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