RBI के फैसले के बाद भी नहीं संभला बाजार! सेंसेक्स 117 अंक टूटा, निफ्टी 23350 पर फिसला; जानें क्यों आई गिरावट?
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर टिकी थीं। हालांकि RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा और अपने रुख में भी कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद बाजार में खरीदारी का माहौल नहीं बन पाया। दिन के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16% की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21% टूटकर 23,366.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रही। एक समय बाजार बढ़त में भी दिखाई दिया, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई और प्रमुख सूचकांक नुकसान में बंद हुए। आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया, जबकि बैंकिंग शेयरों ने कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की।
किसमें आई गिरावट और कौन चढ़े?
निफ्टी के टॉप लूजर्स में मेटल और आईटी कंपनियां शामिल रहीं। हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, विप्रो, ट्रेंट, कोल इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक के शेयरों की मजबूती ने बाजार की गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
शेयर बाजार में गिरावट की वजहें
1. निवेशकों ने की मुनाफावसूली: बाजार की शुरुआत काफी मजबूत रही थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 300 अंक से ज्यादा चढ़ गया था और निफ्टी भी 23,500 के ऊपर पहुंच गया था। लेकिन जैसे ही शेयरों के दाम बढ़े, कई निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया। इसकी वजह से बाजार की शुरुआती बढ़त खत्म हो गई और अंत में गिरावट देखने को मिली।
2. RBI ने महंगाई का अनुमान बढ़ाया: आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। मई से अब तक पेट्रोल के दाम करीब 7.4% और डीजल के दाम 8.4% बढ़ चुके हैं। बढ़ती महंगाई से निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसका असर बाजार पर पड़ा।
3. GDP का अनुमान घटाया: आरबीआई ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान भी कम कर दिया है। अब वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ 6.6% रहने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में इसे 6.9% बताया गया था। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के अनुमानित 7.6% विकास दर से भी कम है। कमजोर ग्रोथ के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर पड़ा और बाजार में दबाव बढ़ गया।
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