डॉक्टर से मिलने के बाद Google सर्च करने लगते हैं दिल्ली-एनसीआर के लगभग 80% मरीज, स्टडी में हुआ खुलासा

हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में लगभग 80% मरीजों को भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को समझने में मुश्किल हो रही है। डॉक्टर से सलाह लेने के बाद भी उनके मन में कई सवाल अधूरे रह जाते हैं। ऐसे में उस जानकारी को पाने के लिए वे इंटरनेट का सहारा लेते हैं। वहीं लगभग 72 प्रतिशत मरीजों ने यह कहा कि उन्हें कोर्डिनेशन, हेल्पडेस्क, हेल्पलाइन या डिजिटल हेल्प टूल जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करना नहीं आ पता है। 'इंडिया पेशेंट नेविगेशन एंड कन्फ्यूज़न इंडेक्स (IPNCI) 2026' की स्टडी में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फ़रीदाबाद और ग़ाज़ियाबाद के 1,000 लोगों को शामिल किया गया। इस स्टडी से मरीज़ों को मिलने वाली गाइडेंस, देखभाल के तालमेल और हेल्थकेयर सिस्टम को समझने की प्रक्रिया में बड़ी कमियों का पता चला। 

डॉक्टर से मिलने के बाद 80 प्रतिशत मरीजों में किया गूगल

स्टडी में पाया गया कि 73.8% मरीज़ों को डॉक्टर से सलाह लेते समय जल्दबाज़ी महसूस हुई। वहीं, 78.5% मरीज़ों ने अपॉइंटमेंट के बाद गूगल या सोशल मीडिया पर जानकारी खोजी क्योंकि उन्हें बीमारी की पहचान, इलाज के प्लान या आगे क्या करना है, इस बारे में अच्छी तरह से जानकारी नहीं मिली थी। इसके अलावा, 70% लोगों ने बताया कि उन्हें टेस्ट, डायग्नोस्टिक्स या स्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह लेने के लिए आगे कहाँ जाना है, इस बारे में जानकारी ठीक से नहीं मिली। ​वहीं, 72 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें मरीज़ कोऑर्डिनेटर, हेल्पडेस्क या डिजिटल सहायता टूल जैसी सहायता सेवाओं तक पहुँच नहीं मिली। यह स्टडी 'पैसिफिक वनहेल्थ हॉस्पिटल' ने 'इंडियन मेडिकल एकेडमी फॉर प्रिवेंटिव हेल्थ (IMAPH)' के साथ मिलकर की थी

कमज़ोर हुआ है सेकेंडरी हेल्थकेयर

पैसिफिक वनहेल्थ हॉस्पिटल के फ़ाउंडर साकेत बंसल ने कहा, "भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में मिसिंग मिडिल साफ़ तौर पर दिखाई दे रही है। मरीज़ सीधे बड़े अस्पतालों में पहुँच रहे हैं क्योंकि सेकेंडरी केयर सिस्टम कमज़ोर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि आसान और कम्युनिटी-बेस्ड हेल्थकेयर मॉडल के ज़रिए इस स्तर को मज़बूत करने से मरीज़ों का कन्फ्यूजन काफ़ी कम हो सकता है और देखभाल का सिलसिला बेहतर हो सकता है।

मरीज पहुंच रहे सीधे एडवांस्ड केयर सेंटर्स

35.8% मरीज़ों ने बताया कि वे सेकेंडरी केयर सुविधाओं को पूरी तरह छोड़कर सीधे प्राइवेट टर्शियरी अस्पतालों में गए। रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेंड की वजह से एडवांस्ड केयर सेंटर्स पर भीड़ बढ़ रही है, हेल्थकेयर का खर्च बढ़ रहा है और स्पेशलिस्ट सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी हेल्थकेयर सुविधाएं सस्ती होने के बावजूद, सिर्फ़ 21.4 प्रतिशत लोगों ने ही इनका इस्तेमाल किया। IMAPH के एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य डॉ. मोहसिन वली ने कहा कि इन नतीजों से साफ़ पता चलता है कि भारत में हेल्थकेयर की चुनौती अब सिर्फ़ सुविधाओं तक पहुँचने की नहीं, बल्कि सही रास्ता खोजने की भी है। इससे पता चलता है कि इन सुविधाओं तक पहुँचने, उन पर भरोसा करने को लेकर अभी भी चिंताएँ बनी हुई हैं।