‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ रिव्यू: पुरानी मोहब्बत की खुशबू में भीगी मॉडर्न कहानी, कुछ ऐसी है कार्तिक आर्यन और अनन्या की फिल्म
कहानी
फिल्म की कहानी रेहान उर्फ रे (कार्तिक आर्यन) और रूमी (अनन्या पांडे) के इर्द-गिर्द घूमती है। रे एक आजाद ख्याल नौजवान है, जो भविष्य की चिंता किए बिना वर्तमान में जीना पसंद करता है। वहीं रूमी भावनात्मक रूप से परिपक्व है, प्यार में भरोसा रखती है, लेकिन अपने परिवार और खासतौर पर अपने पिता से गहराई से जुड़ी हुई है। एक ट्रिप के दौरान दोनों की मुलाकात होती है और दोस्ती कब प्यार में बदल जाती है, इसका एहसास उन्हें खुद भी नहीं होता। उनकी केमिस्ट्री सहज है और शुरुआती हिस्से में फिल्म आपको मुस्कुराने के कई मौके देती है।
कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब रे रूमी के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है। यहीं से फिल्म सिर्फ एक रोमांटिक कहानी न रहकर रिश्तों और ज़िम्मेदारियों की पड़ताल करने लगती है। रे अमेरिका में रहता है और उसकी ज़िंदगी पहले से तय दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि रूमी अपने पिता को अकेला छोड़ने के डर से जूझ रही है। उसकी बहन की शादी और विदेश जाने की तैयारी इस दुविधा को और गहरा कर देती है। प्यार और परिवार के बीच फंसी रूमी का संघर्ष फिल्म का इमोशनल कोर बनता है।
कैसा है निर्देशन, म्यूज और टेक्निकल एसपेक्ट
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी 'फील-गुड' एनर्जी है। समीर विद्वान ने जानबूझकर कहानी को जरूरत से ज्यादा जटिल नहीं बनाया। फिल्म आराम से आगे बढ़ती है और ह्यूमर, रोमांस व इमोशन के बीच संतुलन बनाए रखती है। कई सीन, खासकर परिवार से जुड़े पल, दिल को छूते हैं और दर्शक खुद को किरदारों से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यह फिल्म बड़े ड्रामैटिक ट्विस्ट्स पर निर्भर नहीं करती, बल्कि रोज़मर्रा की भावनाओं से असर छोड़ने की कोशिश करती है। हालांकि, फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। दूसरा हाफ थोड़ा खिंचा हुआ महसूस होता है और कुछ टकराव ऐसे हैं, जिन्हें और संक्षेप में दिखाया जा सकता था। कुछ मोड़ पहले से अनुमानित लगते हैं, जिससे कहानी कहीं-कहीं जानी-पहचानी राह पर चलती नजर आती है। अगर स्क्रीनप्ले को थोड़ा और टाइट किया जाता तो फिल्म का असर और गहरा हो सकता था।
टेक्निकल रूप से 'तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी' एक सधी हुई फिल्म है। सिनेमैटोग्राफी रिश्तों की गर्माहट और त्योहारों के रंग को खूबसूरती से कैद करती है। कुछ डांस नंबर और विजुअल्स पुराने दौर की रोमांटिक फिल्मों की याद दिलाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर इमोशन्स को सपोर्ट करता है, बिना उन पर हावी हुए। एडिटिंग ज़्यादातर जगह पेस बनाए रखती है, जबकि प्रोडक्शन डिज़ाइन और कॉस्ट्यूम्स फिल्म को यूथफुल और मॉडर्न लुक देते हैं।
फिल्म का संगीत इसकी आत्मा है। गाने न सिर्फ सुनने में अच्छे लगते हैं, बल्कि कहानी के साथ भी बहते हैं। रोमांटिक और इमोशनल सीक्वेंस में म्यूजिक फिल्म के असर को और बढ़ा देता है। संवाद सरल, हल्के-फुल्के और कई जगह दिल को छू लेने वाले हैं, जो किरदारों को ज़मीन से जोड़े रखते हैं।
अभिनय
अभिनय की बात करें तो कार्तिक आर्यन रे के किरदार में सहज और भरोसेमंद नजर आते हैं। वह अपने चिर-परिचित चार्म के साथ ह्यूमर और इमोशनल कमजोरी के बीच अच्छा संतुलन बनाते हैं। एक ऐसा युवक, जो प्यार तो करता है लेकिन जिम्मेदारियों से डरता भी है, इस द्वंद्व को कार्तिक अच्छे से निभाते हैं। अनन्या पांडे रूमी के रोल में पहले से ज़्यादा कॉन्फिडेंट और मैच्योर दिखती हैं। उनके किरदार की भावनात्मक उलझन और आंतरिक संघर्ष प्रभावी ढंग से सामने आता है। नीना गुप्ता रे की मां के रूप में फिल्म में गहराई जोड़ती हैं और हर सीन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। जैकी श्रॉफ रूमी के पिता कर्नल अमर वर्धन सिंह के रूप में कम स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं। उनका शांत लेकिन सख्त व्यक्तित्व कहानी को मजबूती देता है। सपोर्टिंग एक्टर्स, खासकर टीकू तलसानिया और अफनान फज़ली, फिल्म में हल्कापन और ह्यूमर बनाए रखते हैं।
खामियां
हालांकि 'तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी' का शुरुआती हिस्सा दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहता है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी थोड़ा खिंचती हुई लगती है। कुछ दृश्य, खासकर झगड़े और पारिवारिक टकराव, जरूरत से ज्यादा लंबे खींचे गए हैं, जिससे कहानी का फ्लो धीमा महसूस होता है। इसके अलावा, कुछ मोड़ और भावनात्मक पल पहले से अनुमानित लगते हैं, जिससे फिल्म का अनुभव कुछ हद तक पहले देखी गई रोमांटिक कॉमेडी जैसी छवि देता है। हालांकि एक्टर्स की केमिस्ट्री और हल्के-फुल्के हास्य ने इन कमजोरियों को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन कहानी के कुछ हिस्से और चुस्त-सुथरे होने चाहिए थे ताकि फिल्म अधिक दमदार और यादगार बनती। कुछ हिस्से ऐसे भी आते हैं, जहां कार्तिक और अनन्या की केमिस्ट्री थोड़ी हिली हुई लगती है।
देखें या नहीं?
'तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी' एक सुकून देने वाली रोमांटिक कॉमेडी है, जो प्यार, त्याग और पारिवारिक रिश्तों के महत्व को सरल अंदाज में सामने रखती है। यह फिल्म कोई नया सिनेमाई प्रयोग नहीं करती, लेकिन अपनी ईमानदारी, भावनाओं और अभिनय के दम पर दर्शकों को बांधे रखती है। अगर आप तेज-तर्रार ड्रामा नहीं, बल्कि एक हल्की, भावनात्मक और दिल से जुड़ने वाली प्रेम कहानी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है खासकर छुट्टियों के मौसम में।
