Loading...

बांग्लादेश की सियासत में क्या था खालिदा जिया का कद? भारत से कैसे रहे उनके रिश्ते?

4 दशकों से ज्यादा लंबी रही सियासी यात्रा

खालिदा जिया की राजनीतिक यात्रा 4 दशकों से ज्यादा लंबी रही, जिसमें कभी वह ऊंचाइयों पर पहुंची तो कभी उन्हें गिरावट का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने एक बड़ी पार्टी का नेतृत्व किया, देश की सत्ता संभाली, लेकिन उनकी पहचान भ्रष्टाचार से भी हुई। खालिदा जिया का सार्वजनिक जीवन में आना एक संयोग माना जाता है। 35 साल की उम्र में विधवा होने के एक दशक बाद वह प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन राजनीति में उनका प्रवेश किसी प्लानिंग के तहत नहीं हुई थी। सियासत से खालिदा का परिचय उनके पति राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 30 मई 1981 को हुए एक असफल सैन्य विद्रोह में हत्या के बाद हुआ।

 

तेजी से BNP के शीर्ष पर पहुंची थीं खालिदा

जियाउर रहमान एक सैन्य तानाशाह से राजनेता बने थे। इससे पहले खालिदा सिर्फ एक जनरल की पत्नी और फिर फर्स्ट लेडी के रूप में जानी जाती थीं। लेकिन जल्द ही वह अपने पति द्वारा 1978 में बनाई गई पार्टी BNP की शीर्ष नेता बन गईं। 3 जनवरी 1982 को वह पार्टी की प्राथमिक सदस्य बनीं। इसके बाद मार्च 1983 में उपाध्यक्ष और मई 1984 में चेयरपर्सन बनीं। चेयरपर्सन का पद उन्होंने अपनी मौत तक संभाला। सियासत की दुनिया में उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना रहीं, जो अवामी लीग की प्रमुख हैं। 1982 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल एचएम इरशाद के सैन्य तख्तापलट के बाद, खालिदा ने लोकतंत्र बहाल करने के लिए आंदोलन शुरू किया।

चुनाव के बहिष्कार ने बना दिया लोकप्रिय

1986 में इरशाद ने राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा की, जिसके खिलाफ खालिदा की बीएनपी गठबंधन और हसीना की अवामी लीग के 15-पार्टी गठबंधन ने विरोध किया। दोनों गठबंधनों ने शुरू में चुनाव का बहिष्कार किया, लेकिन अवामी लीग, कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य दलों ने बाद में इसमें हिस्सा ले लिया। खालिदा के गठबंधन ने बहिष्कार जारी रखा। इरशाद ने हसीना को घर में नजरबंद कर दिया और मार्च के चुनाव में जबरदस्त धांधली के बाद राष्ट्रपति बने। वह जतिया पार्टी के उम्मीदवार थे।' इधर खालिदा की लोकप्रियता 1986 के चुनाव बहिष्कार के बाद बहुत बढ़ गई थी।

1991 के चुनावों में दर्ज की शानदार जीत

दिसंबर 1990 में इरशाद शासन के जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश शहाबुद्दीन अहमद की अगुवाई वाली कार्यवाहक सरकार ने फरवरी 1991 में चुनाव कराए। इन चुनावों में बहुमत के साथ BNP की जीत ने तमाम सियासी पंडितों को हैरान कर दिया क्योंकि उनकी नजर में अवामी लीग जीत की सबसे प्रबल दावेदार थी। नई संसद ने संविधान में बदलाव किया, राष्ट्रपति प्रणाली से संसदीय प्रणाली में बदलाव हुआ, और खालिदा बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। वह मुस्लिम दुनिया में पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो के बाद दूसरी महिला प्रधानमंत्री थीं।

 

Image Gallery