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KGMU के डॉक्टर रमीज मलिक ने हिंदू लड़की को धर्मांतरण के लिए कैसे किया मजबूर? विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

हॉस्टल के बजाय कैंपस से बाहर लिया था कमरा

जान लें कि विशाखा कमेटी की जांच 22 दिसंबर, 2025 को शुरू हुई थी। पीड़िता महिला रेजिडेंट डॉक्टर और आरोपी डॉ. रमीज कमेटी के सामने पेश हुए। कमेटी ने जांच में पाया कि दोनों रेजिडेंट डॉक्टर को केजीएमयू कैंपस के अंदर हॉस्टल में कमरे दिए गए थे लेकिन दोनों आपसी रजामंदी से हॉस्टल में नहीं बल्कि कैंपस के बाहर रहते थे।

विशाखा कमेटी को पीड़िता ने सुनाई आपबीती

पीड़िता ने विशाखा कमेटी के सामने बताया कि जुलाई, 2025 में उसकी डॉ. रमीज से दोस्ती हुई थी। फिर सितंबर में उसे पता चला कि डॉ. रमीज की फरवरी, 2025 में आगरा में एक डॉक्टर से शादी हो चुकी है। इसके बाद उसने डॉ. रमीज से दोस्ती खत्म करने की कोशिश की तो डॉ. रमीज ने उसे परेशान करना और डराना-धमकाना शुरू किया। फिर पीड़ित महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने पुलिस से तो जबरदस्ती धर्मांतरण की शिकायत की  लेकिन विशाखा कमेटी के सामने धर्मांतरण की शिकायत नहीं की।

आरोपी डॉ. रमीज ने जांच के दौरान बोला झूठ

डॉ. रमीज भी विशाखा कमेटी के सामने पेश हुए। डॉ. रमीज ने कमेटी के सामने झूठ बोला और बार-बार कहा कि वो शादीशुदा नहीं हैं। डॉ. रमीज एक ही बार कमेटी के सामने पेश हुए फिर फरार हो गए। डॉ. रमीज के पिता भी कमेटी के सामने पेश हुए। उन्होंने भी डॉ. रमीज के शादीशुदा होने से इनकार किया।

आरोपी डॉक्टर की पत्नी का ऐसे हुआ खुलासा

विशाखा कमेटी ने उस महिला डॉक्टर से भी फोन पर बात की जिससे डॉ. रमीज ने फरवरी में शादी की थी। विशाखा कमेटी ने जांच में डॉ. रमीज को महिला रेजिडेंट डॉक्टर का शारीरिक और मानसिक शोषण का दोषी पाया। केजीएमयू ने डॉ. रमीज को पहले ही सस्पेंड कर रखा है। अब कमेटी ने DGME यानी डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल एजुकेशन से डॉ. रमीज के निष्कासन की सिफारिश की है। पीड़ित महिला डॉक्टर को 20 दिन की छुट्टी दी गई है। उनको हॉस्टल में कमरा और एक महिला सिक्योरिटी दी गई है।