दुनिया के महासागर गर्म क्यों होते जा रहे हैं? एल नीनो से दुनिया को कितना खतरा है? समझें पूरी बात
दुनिया के महासागर लगातार गर्म हो रहे हैं और जून महीने में तो एक नया रिकॉर्ड बन गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून महीने में दुनिया के महासागरों की सतह का औसत तापमान अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले सबसे अधिक तापमान 2023-24 के एल नीनो (El Nino) के दौरान दर्ज किया गया था। अब एक नया एल नीनो विकसित हो रहा है, जिसके कारण आने वाले महीनों और अगले साल गर्मी और भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि महासागर क्यों गर्म हो रहे हैं, इसका दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है।
पिछले 150 सालों में कितने गर्म हुए महासागर?
इस समय दुनिया के उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण महासागरों की सतह का औसत तापमान 21 डिग्री सेल्सियस से थोड़ा कम है। इसके मुकाबले, वर्ष 1870 यानी बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण शुरू होने से पहले यह तापमान लगभग 19.6 डिग्री सेल्सियस था। पहली नजर में करीब 1.4 डिग्री सेल्सियस का अंतर बहुत बड़ा नहीं लगता, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरे महासागर को इतना गर्म करने के लिए ऊर्जा की बेहद विशाल मात्रा की जरूरत होती है।
आखिर ये महासागर इतने गर्म क्यों हो रहे हैं?
महासागरों के इस कदर गर्म होने का सबसे बड़ा कारण कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का लगातार इस्तेमाल है। इनसे निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में गर्मी को फंसा देती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी में जितनी अतिरिक्त गर्मी जमा हुई है, उसका 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा महासागरों ने अपने अंदर सोख लिया है। इसी वजह से महासागर तेजी से गर्म हो रहे हैं।
दुनिया में कितनी तेजी से बढ़ रही है गर्मी?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2025 में महासागरों में जितनी अतिरिक्त गर्मी जमा हुई, वह हर दिन हर सेकंड लगभग 12 हिरोशिमा परमाणु बमों के विस्फोट से निकलने वाली ऊर्जा के बराबर थी। अगर वर्तमान स्थिति की तुलना अतीत से करें तो वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा मौसम करीब 1 लाख 20 हजार साल पहले, यानी पिछले हिमयुग से पहले देखने को मिला था। उस समय पृथ्वी की कक्षा में धीरे-धीरे बदलाव होने से हजारों वर्षों में तापमान बढ़ा था। लेकिन इंसानों की गतिविधियों के कारण लगभग वही बदलाव सिर्फ करीब 100 साल में देखने को मिल रहा है।
महासागर गर्म होने से कौन से खतरे होते हैं?
महासागर के गर्म होने से कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि महासागरों में जमा गर्मी वहीं नहीं रहती। इसका असर पूरे मौसम तंत्र पर पड़ता है। गर्म महासागर की वजह से चक्रवात ज्यादा शक्तिशाली हो सकते हैं। हवा में नमी बढ़ जाती है। भारी और अचानक बारिश की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बाढ़ का खतरा बढ़ता है। समुद्र के ऊपर बनने वाली गर्म हवा जमीन पर भी भीषण हीटवेव ला सकती है। यानी समुद्र का तापमान बढ़ना केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे विश्व के मौसम पर पड़ता है।
