Loading...

हर सुख दुख में साथ साथ, कागजी नहीं अटूट है ये फ्रेंडशिप, जानते हैं कितनी पुरानी है भारत-रूस की दोस्ती?

किसी की धमकी का दोस्ती पर कोई असर नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की लगातार धमकी और भारत की रूस से लगातार बढ़ती दोस्ती, इससे संकेत साफ है कि भारत, अमेरिका के दबाव में अपने सदियों पुराने दोस्त को छोड़ने को तैयार नहीं है। रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते बढ़ने के साथ ही भारत-रूस साझेदारी की एक बार फिर अग्निपरीक्षा है, जब रूसी राष्ट्रपति सारे बंधनों को तोड़कर भारत की यात्रा पर आज आ रहे हैं। पूरा देश पुतिन के आगमन को लेकर पलक पांवरे बिछाए हुए है। हो भी क्यों नहीं, रूस से हमारा रिश्ता ही ऐसा है।

आज की नहीं है दोस्ती, बहुत है पुरानी

भारत और रूस, देशों के बीच की ये दोस्ती आज की नहीं है, बल्कि ये याराना दशकों पुराना है। जब से भारत को आजादी मिली है, या यूं कहें कि स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले ही। तब से रूस से रिश्ता मजबूत है। उस वक्त रूस सोवियत संघ था, तब से भारत की दोस्ती है। सोवियत संघ ने भारत के साथ शांति, मैत्री और सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किए और हमेशा साथ खड़ा रहा। जब अमेरिका ने अपना सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में भेजा, तो सोवियत संघ ने भारत की रक्षा के लिए अपनी परमाणु पनडुब्बियों को तैनात किया, जिससे भारत को निर्णायक जीत मिली। शीत युद्ध का दौरान सोवियत संघ भारत का एक महत्वपूर्ण समर्थक था, जिसने पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत का साथ दिया।

सुख दुख में रहे हैं साथ

रूस ने कश्मीर जैसे संवदेनशील मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के पक्ष में कई बार वीटो का इस्तेमाल किया है। रूस 60 वर्षों से अधिक समय से भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रहा है, जिसने जटिल प्रौद्योगिकी और उपकरणों (जैसे सुखोई Su-30, S-400 मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल) की आपूर्ति की है। रूस, कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों (जैसे आर्यभट्ट उपग्रह) में सहयोग करके भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति में मदद करता रहा है। यह साझेदारी भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है, जो किसी भी तीसरे पक्ष के दबाव से अप्रभावित रही है।

कब कब रूस ने दिया भारत का साथ

रूस के साथ भारत का संबंध सिर्फ व्यापारिक नहीं, ये दोस्ती सिर्फ तेल व्यापार तक ही सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच अप्रैल 1947 में राजनयिक संबंध बने थे और तब से दोनों देशों के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध रहे हैं। चाहे 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान, जिसमें रूस ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी या फिर 1966 में ताशकंद शिखर सम्मेलन के समय जिसकी रूस ने मेजबानी की थी और शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।

1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान रूस ने भारत का समर्थन किया था। 1971 में रूस ने भारत की रक्षा की खातिर अपने परमाणु जहाजों को तैनात कर दिया था। अमेरिका को जवाब देने के लिए रूस ने परमाणु हथियारों से लैस अपने बेड़े को भारत के लिए रवाना कर दिया था। रूस के इस बेड़े में अच्‍छी-खासी संख्‍या में परमाणु जहाज और पनडुब्बियां शामिल थीं। रूस की मदद के कारण ही ब्रिटेन और अमेरिका को पीछे हटना पड़ा और अमेरिकी जहाज बंगाल की खाड़ी में एंट्री नहीं कर सके। 

यूं ही कायम रहेगी दोस्ती

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भी भारत ने रूस के साथ अपने संबंध वैसे ही बनाए रखे हैं, जैसे पहले थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी और अब पुतिन भारत आ रहे हैं। दोनों देशों की दोस्ती से भले ही दुनिया को फर्क पड़ता हो, इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। यही वजह है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान करने से भी परहेज किया है।

भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, तो तब के सोवियत संघ ने अमेरिका के उलट भारत के साथ सहयोग से इनकार नहीं किया और भारत का साथ दिया। इसके अलावा, रूस भारत के लिए हथियारों का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। आज ही नहीं, 1990 के दशक की शुरुआत में ही सोवियत संघ भारतीय सेना के लगभग 70 प्रतिशत हथियारों, उसकी वायु सेना प्रणालियों का 80 प्रतिशत और नौसेना का 85 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता था, हालांकि आज भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है, लेकिन आज की ये दोस्ती नहीं, ये दोस्ती कायम थी और ऐसे ही कायम रहेगी।

Image Gallery