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सोने के दाम में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली, जानें आज 10 ग्राम Gold की कीमत कितने पर आईं

चांदी लगातार दूसरे दिन फिसली

चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। गुरुवार को चांदी ₹900 टूटकर ₹1,80,000 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर आ गई, जबकि पिछली सत्र में यह ₹1,80,900 प्रति किलोग्राम थी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ एनालिस्ट साउमिल गांधी ने कहा कि सोने की कीमतें गुरुवार को कमजोर रही क्योंकि बाजार में खरीदारी कम रही और निवेशक फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले सतर्क बने रहे।

ग्लोबल मार्केट में सोना

वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.15% गिरकर 4,197.10 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया। मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट प्रवीण सिंह ने बताया कि अमेरिका के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों ने सोने की कमजोरी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि नवंबर में US ADP रोजगार आंकड़े गिरावट दिखा रहे हैं, जो 2023 के बाद का सबसे कमजोर डेटा है। इससे फेडरल रिज़र्व द्वारा संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमत भी कमजोर

चांदी का वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन भी नीचे रहा। स्पॉट सिल्वर 2% गिरकर USD 57.34 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी। कोटक सिक्योरिटीज की कायनात चैनवाला ने कहा कि चांदी 57.2 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है क्योंकि बाजार अमेरिकी बेरोजगारी क्लेम्स और लेऑफ डेटा का इंतजार कर रहा है। हालांकि, श्रम बाजार में कमजोरी, धीमी आर्थिक वृद्धि, केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद और फेड द्वारा दर कटौती की उम्मीदें सोने–चांदी के निकट अवधि के आउटलुक को समर्थन दे रही हैं।

चांदी अब भी वैश्विक रिकॉर्ड स्तर पर

बुधवार को चांदी ने वैश्विक बाजार में USD 58.97 प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छू लिया था। Augmont की हेड ऑफ रिसर्च, रेनीशा चैनानी ने कहा कि चांदी रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर बनी हुई है क्योंकि निवेशक फेड की दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं और ETF में बड़े पैमाने पर निवेश जारी है। उन्होंने बताया कि सिल्वर ETFs ने मंगलवार को लगभग 200 टन की खरीद की, जिससे कुल होल्डिंग 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

चैनानी के अनुसार इस साल चांदी की कीमतों में 100% की वृद्धि हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं - बाजार की तरलता को लेकर चिंता, अमेरिका और चीन में इन्वेंट्री की कमी, चांदी का US की महत्वपूर्ण खनिज सूची में शामिल होना और लगातार सप्लाई का घाटा।