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पत्नी को 72 टुकड़ों में काटा था, सॉफ्टवेयर इंजीनियर की खूनी वारदात, मर्डर मिस्ट्री सुन कांप जाएगा कलेजा

सितंबर, 2017 को देहरादून की अदालत ने राजेश गुलाटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने आदेश दिया है कि 70,000 रुपये सरकारी खजाने में जमा किए जाएं, जबकि शेष राशि अनुपमा के बच्चों के वयस्क होने तक बैंक में रखी जाए।


2010 में एक पति ने की पत्नी की हत्या

अनुपमा गुलाटी की हत्या का मामला 12 दिसंबर, 2010 को तब सामने आया जब अनुपमा का भाई दिल्ली से देहरादून आया था। 15 साल पहले अमेरिका से लौटे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी थी और उसके शव को 72 टुकड़ों में काटा था और सबूत मिटाने के लिए शवों के टुकड़ों को शहर के अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया था। मामला अक्टूबर 2010 का है।

17 अक्टूबर 2010 की रात को झगड़े के दौरान पति राजेश ने अनुपमा को थप्पड़ मारा था, जिससे अनुपमा का सिर दीवार से टकराया और वह बेहोश हो गई। डर के मारे कि कहीं वह होश में आकर शिकायत न कर दे, राजेश ने निर्ममता से उसकी हत्या कर दी। राजेश ने इलेक्ट्रिक की आरी और डीप फ्रीजर खरीदा, पत्नी अनुपमा के शव को 72 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक बैग्स में रखकर फ्रीजर में छिपा दिया। उसके बाद वो धीरे-धीरे इन टुकड़ों को देहरादून के सुनसान इलाकों में एक एक कर फेंकता रहा। 

2017 में देहरादून की अदालत ने राजेश को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई और इसके साथ ही 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद राजेश गुलाटी ने निचले अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और 8 साल चली सुनवाई के बाद बुधवार को जस्टिस रविंद्र मैथानी और जस्टिस आलोक महरा की बेंच ने उसकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।

कैसे हुआ हत्या का खुलासा

बच्चों ने जब मां के बारे में पूछा तो राजेश ने उन्हें बताया कि वह नानी के घर चली गई है। हालांकि बच्चों को पता था कि मां डीप फ्रीजर में हैं, राजेश बच्चों को घुमाने के बहाने शव के टुकड़ों को अलग-अलग जगह फेंकता रहा। इस बीच जब अनुपमा के घर वालों से उसकी बात नहीं हुई तो शक हुआ। अनुपमा के भाई ने अपने एक दोस्त को पता करने के लिए कहा। भाई का दोस्त 11 दिसंबर को पासपोर्ट कर्मचारी बनकर जब घर पहुंचा तो उसने बताया कि अनुपमा दिल्ली में हैं।

 इसके बाद अनुपमा के भाई और परिजनों ने जब राजेश पर दबाव बढ़ाया तो राजेश को पता चल गया कि अब जल्द ही उसकी पोल खुलने वाली है। ये सोचकर उसने विदेश भागने की तैयारी भी शुरू कर दी लेकिन 12 दिसंबर को अनुपमा का भाई पुलिस के साथ पहुंचा। पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर जब पूछताछ शुरू की तो इस पूरे हत्याकांड का खुलासा हुआ, जिसे सुनकर पुलिस भी दंग रह गई।