कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन, जिनके BJD जॉइन करते ही सियासी हलचल तेज; नवीन पटनायक की उत्तराधिकारी बनेंगी?

ओडिशा की पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता आर. कार्तिकेयन ने गुरुवार को बीजू जनता दल (BJD) की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की मौजूदगी में उन्होंने बीजेडी जॉइन की। इस मौके पर नवीन पटनायक ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि प्रशासनिक क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव पार्टी और जनता दोनों के लिए लाभदायक साबित होगा।

नवीन पटनायक ने कहा कि सुजाता आर. कार्तिकेयन ने विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े विभागों में लंबे समय तक काम किया है। ऐसे में उनका अनुभव महिलाओं के सशक्तिकरण और जनसेवा के क्षेत्र में बीजेडी के प्रयासों को और मजबूत करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी में नई भूमिका निभाते हुए वह लोगों, खासकर महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

BJD में शामिल होने के बाद क्या बोलीं सुजाता?

बीजेडी में शामिल होने के बाद सुजाता ने नवीन पटनायक का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले 24 वर्षों के प्रशासनिक जीवन में उन्हें नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा के लोगों की सेवा करने का अवसर मिला। अब राजनीति के माध्यम से उन्हें फिर से राज्य और जनता के लिए काम करने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा और ओडिशा की जनता के आशीर्वाद से वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ राज्य की सेवा जारी रखेंगी। सदस्यता ग्रहण करने के दौरान सुजाता कार्तिकेयन ने नवीन पटनायक का आशीर्वाद भी लिया।

कौन हैं सुजाता आर. कार्तिकेयन?

  1. सुजाता आर. कार्तिकेयन वर्ष 2000 बैच की ओडिशा कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी रही हैं। वह अपनी प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ पूर्व आईएएस अधिकारी और बीजेडी के पूर्व वरिष्ठ नेता वी. के. पांडियन की पत्नी होने के कारण भी काफी चर्चित रही हैं।
  2. करीब 24 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने ओडिशा सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक कल्याण और वित्त विभाग जैसे अहम विभागों में काम किया। प्रशासनिक सेवा के दौरान उनकी पहचान एक अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी के रूप में रही।
  3. उनकी सबसे चर्चित जिम्मेदारियों में मिशन शक्ति विभाग की आयुक्त-सह-सचिव की भूमिका रही। मिशन शक्ति ओडिशा सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और आजीविका के अवसर बढ़ाना है। उनके कार्यकाल में मिशन शक्ति कार्यक्रम का काफी विस्तार हुआ और यह राज्य की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं में शामिल हो गया। बाद में उन्होंने ओडिशा सरकार के वित्त विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य किया।
  4. साल 2024 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें सार्वजनिक संपर्क वाले विभाग से हटाकर गैर-सार्वजनिक विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया था, जिनमें उनके आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा ने इस मुद्दे को उठाया था क्योंकि उस समय उनके पति वी.के. पांडियन बीजेडी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।
  5. चुनाव के बाद सुजाता कार्तिकेयन कई महीनों तक चाइल्ड केयर लीव पर रहीं। बाद में जब उनकी छुट्टी बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया तो उन्होंने वित्त विभाग में दोबारा अपनी जिम्मेदारी संभाली। मार्च 2025 में केंद्र सरकार ने उनके वीआरएस के आवेदन को मंजूरी दे दी। इस दौरान सामान्य नोटिस अवधि में भी छूट दी गई। उनके वीआरएस को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई क्योंकि इससे पहले उनके पति वी.के. पांडियन भी वीआरएस लेकर राजनीति में आए थे।
  6. हालांकि उस समय सुजाता कार्तिकेयन ने कहा था कि उनका वीआरएस निजी कारणों से है और राजनीति में आने की कोई योजना नहीं है। लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद लगातार यह चर्चा होती रही कि वह भविष्य में सक्रिय राजनीति में आ सकती हैं। अब गुरुवार को बीजेडी की सदस्यता ग्रहण करने के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया।
  7. वी.के. पांडियन को लेकर भी लंबे समय तक ओडिशा की राजनीति में चर्चा होती रही। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि बिना किसी निर्वाचित पद पर रहते हुए भी उनका सरकार और बीजेडी में काफी प्रभाव था। वहीं, नवीन पटनायक ने कई बार स्पष्ट किया था कि पांडियन उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं हैं।
  8. साल 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेडी की हार के बाद वी.के. पांडियन ने सक्रिय राजनीति से खुद को अलग करने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि उनके कारण पार्टी को नुकसान पहुंचा है तो उन्हें इसका दुख है और इसी वजह से वह राजनीति से दूर हो रहे हैं। तब से लेकर वर्ष 2026 तक वह सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आए।

नवीन पटनायक के ऑफिस से काम संभालेंगीं सुजाता?

अब सुजाता आर. कार्तिकेयन के बीजेडी में शामिल होने को ओडिशा की राजनीति का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ संगठन और जनता दोनों को मिलेगा, खासकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर। पार्टी के अंदर दबी जुबान में यह चर्चा है कि सुजाता का बीजेडी में आना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भले ही वे तुरंत किसी बड़े पद पर न बैठें लेकिन वे नवीन पटनायक के ऑफिस से काम संभाल सकती हैं।